राजनीति के अटल नायक नही रहे , 93 की उम्र में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का दिल्ली एम्स में निधन

राजनीति के भीष्म पितामह नही रहे

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Atal bihari vajpayee Lakshay News
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नई दिल्ली. भारत रत्न और तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार शाम 5.05 बजे निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे। दो महीने से एम्स में भर्ती थे। लेकिन, पिछले 36 घंटों के दौरान उनकी सेहत बिगड़ती चली गई। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। इससे पहले वे 9 साल से बीमार थे। राजनीति की आत्मा की रोशनी जैसे घर में ही कैद थी। वे जीवित थे, लेकिन नहीं जैसे। किसी से बात नहीं करते थे। जिनका भाषण सुनने विरोधी भी चुपके से सभा में जाते थे, उसी सरस्वती पुत्र ने मौन ओढ़ रखा था।

अटलजी को यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन के बाद 11 जून को एम्स में भर्ती किया गया था। उनकी सिर्फ एक किडनी काम कर रही थी। 30 साल से अटलजी के निजी फिजिशियन डॉ. रणदीप गुलेरिया की देखरेख में एम्स में उनका इलाज चल रहा था।

तीन साल से कोई तस्वीर सामने नहीं आई : अटलजी की तस्वीर पिछली बार 2015 में सामने आई थी। तब तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए वाजपेयी को उनके घर जाकर भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया था।

तीन बार प्रधानमंत्री बने : वाजपेयी सबसे पहले 1996 में 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने। बहुमत साबित नहीं कर पाने की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। दूसरी बार वे 1998 में प्रधानमंत्री बने। सहयोगी पार्टियों के समर्थन वापस लेने की वजह से 13 महीने बाद 1999 में फिर आम चुनाव हुए। 13 अक्टूबर 1999 को वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। इस बार उन्होंने 2004 तक अपना कार्यकाल पूरा किया।

2005 में सक्रिय राजनीति से संन्यास लिया : अटलजी ने 2005 में मुंबई में एक रैली में ऐलान कर दिया कि वे सक्रिय राजनीति से संन्यास ले रहे हैं और लालकृष्ण अाडवाणी और प्रमोद महाजन को बागडोर सौंप रहे हैं। उस वक्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि वाजपेयी मौजूदा राजनीति के भीष्म पितामह हैं।

2009 में तबीयत बिगड़ी थी, वेंटिलेटर पर रखा गया था : 2009 में वाजपेयी की तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें सांस लेने में दिक्कत के बाद कई दिन वेंटिलेटर पर रखा गया था। हालांकि, बाद में वे ठीक हो गए और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। बाद में कहा गया था कि वाजपेयी लकवे के शिकार हैं। इस वजह से वे किसी से बोलते नहीं हैं। बाद में उन्हें स्मृति लोप भी हो गया था। उन्होंने लोगों को पहचानना भी बंद कर दिया।

1924 में ग्वालियर में जन्मे, मूल रूप से कवि और शिक्षक : वाजपेयी मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को जन्मे। वे मूलत: कवि थे और शिक्षक भी रह चुके थे। 1951 में जनसंघ की स्थापना हुई और अटलजी ने चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। 1957 में वाजपेयी मथुरा से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए। हालांकि, बलरामपुर सीट से वे जीत गए। 1975-77 के आपातकाल के दौरान वे गिरफ्तार किए गए। 1977 के बाद जनता पार्टी की मोरारजी देसाई की सरकार में वे विदेश मंत्री भी रहे। 1980 में उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी। वे 10 बार लोकसभा सदस्य रहे।