ईश्वर की किताब में आप अपने पाप नहीं मिटा सकते: एन. रघुरामन

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इतिहास पढ़ चुके हममें से ज्यादातर लोगों को प्रथम व द्वितीय विश्वयुद्ध में हुए सैकड़ों संगठित युद्ध अपराधों के बारे में पता होगा। इनमें सबसे कुख्यात होलोकास्ट है, जिसमें लाखों यहूदियों, पोलैंड और रोमानिया के नागरिकों को सुनियोजित तरीके से या तो मार डाला गया या वे अत्याचारों व दुर्व्यवहार के शिकार हो गए। इस नरसंहार में खासतौर पर भूख और प्यास से व्यापक स्तर पर मौतें हुईं। कुछ स्रोतों का दावा है कि जर्मनी की नाज़ी सेना ने रेगिस्तान में मौजूद कुओं के पानी में जहर मिला दिया। जब ये जघन्य अपराध अंजाम दिए जा रहे थे, जैकिव पालिज वर्तमान यूक्रेन और तब अधिकृत पोलैंड के ट्रावनिकी लैबर कैम्प में नाज़ियों को सेवाएं दे रहा था। जर्मन आधिपत्य के दौरान पोलैंड के अन्य युवाओं की तरह पालिज को 18 वर्षीय युवक के बतौर जर्मन अर्धसैनिक बल एसएस (स्टॉर्म स्टॉपर्स या सीक्रेट सर्विसेस) ने प्रशिक्षण दिया था। समझा जाता है कि उसने 1943 में ट्रावनिकी में सशस्त्र गार्ड के बतौर सेवाएं दी थीं, जहां उस साल एक दिन में 6 हजार से अधिक यहूदी पुरुष, महिलाएं और बच्चे कैम्प में मारे गए थे।

खूनी जर्मन सत्ता को अपनी सेवाएं देने और नाज़ी अपराधी घोषित किए जाने के बाद भी वह दस अन्य लोगों के साथ आव्रजन के कागजातों में झूठी जानकारी देकर 1949 में अमेरिका में प्रवेश करने में कामयाब हो गया। अपने वीज़ा आवेदन में उसने उस दौर में पोलैंड में अपने पिता के खेत और एक जर्मन फैक्ट्री में काम करने का दावा किया। तब से वह न्यूयॉर्क सिटी में क्वीन्स नामक जगह पर शांति से जी रहा था। जांचकर्ताओं ने सबसे पहले 1993 में उसका पता लगाया, 2003 में उससे अमेरिकी नागरिकता छीन ली गई और 2004 में एक संघीय आव्रजन न्यायाधीश ने उसे देश से निकाल देने का आदेश दिया। इसके पहले जिस एकमात्र व्यक्ति को देश से बाहर निकालने का आदेश दिया गया, वह था जॉन डेमजान्जक। इस रिटायर्ड ऑटोवर्कर ने भी वहीं पर गार्ड का काम किया था। 2012 में जर्मनी में 91 वर्ष की उम्र में उसकी मौत हुई और 28,000 लोगों की मौत में अपनी भूमिका के आरोप में मिली कैद की सजा भी पूरी नहीं कर पाया। 2005 से जस्टिस डिपार्टमेंट ने 11 नाज़ी अपराधियों के खिलाफ देश निकाले के आदेश हासिल किए हैं। इनमें से नौ लोगों की मौत न्याय फैसले केे पहले ही हो गई।

बरसों तक अमेरिकी अधिकारी किसी देश को, खासतौर पर पोलैंड को, जहां वह जन्मा था जैकिव पालिज को स्वीकार करने के लिए राजी नहीं कर पाए। वह अंतिम नाज़ी युद्ध अपराधी है, जो संदिग्ध ढंग से अमेरिका में रह रहा था। 21 अगस्त 2018 को व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पालिज को देश से निकालने का आदेश प्राप्त कर लिया है। उन्होंने आव्रजन अधिकारियों से कहा कि उन्हें पकड़कर स्ट्रेचर पर रखकर क्वीन्स के उसके घर से निकालकर एअर एंबुलेंस से जर्मनी के डुसेलडोर्फ ले जाया जाए। 95 वर्ष का पालिज अब बहुत कमजोर हो चुका है, जो मंगलवार को डुसेलडोर्फ एअरपोर्ट पहुंचा। उसे रेडक्रास एंबुलेंस में उत्तर पश्चिमी जर्मनी के मुन्स्टर स्थित नर्सिंग होम ले जाया गया। पालिज दुनिया के सबसे व्यस्त शहर के कोने में शांति से जीवन जी रहा था। उसके यहूदी पड़ोसियों को भी नहीं पता था कि वह उनके पूर्वजों की हत्या करने वाला नाज़ी अपराधी है। लेकिन, तकदीर ने भूमिका निभाई। संभव है कि वह जर्मनी द्वारा आगे सुनाई जाने वाली सजा भुगतने तक जीवित न रह सके पर उसे मालूम तो पड़ गया कि अब दुनिया को पता है कि उसने कौन से अपराध किए थे।
फंडा यह है कि  जैसे आप अपने टेक्निकल फूटप्रिंट नहीं मिटा सकते, उसी तरह ईश्वर की किताब में आप अपने पाप नहीं मिटा सकते।
एन. रघुरामन